Monday, July 18, 2016

कड़ुवा सच 
जीवन एक कड़ुवा सच, स्वार्थ में लिपटा
अपनों तक सिमटा परिभाषित किन्तु कुंठित 
अपनों  की सूचि में बारी बारी सभी पराये
स्वार्थ सिद्धि के समीकरण कलेजे से लगाए
झुलस चुकी आत्मा को सफेदी से छुपाये
जीवन एक कडुवा सच...
परिधि पर नाचता, धुरी सधा
उदय  से अस्ताचल  तक का सफर
सपनो  के बाजार में बिकता हर पल
इंसान होने का दारुण दर्द' इंसानियत बे पर्द
जीवन एक कडुवा सच...

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